एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धतियों और रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित विकल्प को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण अनुकूल फसल सुरक्षा समाधानों पर किसान प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम

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पहली नज़र ब्यूरो कांगड़ा

कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा ने हिल इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली के सहयोग से किसानों के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धतियों और रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित विकल्प को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण अनुकूल फसल सुरक्षा समाधानों पर किसान प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में कुल 260 किसानो ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा के प्रभारी डॉ. संजय शर्मा के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है एवं हमारी अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है परंतु खेती के साथ एक चुनौती हमेशा जुड़ी रहती है- फसलों को कीटों और रोगों से बचाना। इन्हीं समस्याओं के समाधान के रूप में कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है परंतु अत्यधिक उपयोग हर चीज़ को विष बना देता है इसलिए उन्होंने किसानों को सलाह दी कि इन कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करें एवं सुरक्षित सीमित और वैज्ञानिक ढंग से करें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अशोक कुमार पंडा, माननीय कुलपति चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कीटनाशक फसल सुरक्षा के लिए एक वरदान हैं, परन्तु जब इनका अविवेकपूर्ण या अत्यधिक प्रयोग होता है तो यही वरदान, अभिशाप बन सकता है इस से न केवल फसलें बल्कि मिट्टी की उर्वरता, जलस्त्रोत, पर्यावरण और मनुष्य का स्वास्थ्य- सभी प्रभावित होते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा की वैज्ञानिक डॉ. नीतू शर्मा ने कहा की खाली कीटनाशकों के डिब्बों को खुले में न फेंके और एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया, जिससे फसल उत्पादन सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल रहे।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि अभिषेक कौशिक (सहायक महाप्रबंधक) हिल इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ने किसानो के लिए कीटनाशकों के सुरक्षित और समझदारीपूर्ण उपयोग पर सरल व प्रभावी वक्तव्य दिया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी किसानों को किट भी विस्तृत की जिसमे मास्क, दस्ताने, एप्रन व टोपी शामिल है.उन्होंने किसानों से आह्वान किया की हमेशा प्रमाणित कीटनाशकों का ही प्रयोग करें, छिडकाव के समय मास्क, दस्ताने और सुरक्षा उपकरण अवश्य पहने।

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Author: Pehali Nazar

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